शिव जयंती, जिसे छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के नाम से भी जाना जाता है, महाराष्ट्र में एक सार्वजनिक त्योहार और अवकाश है। यह त्योहार हर साल 19 फरवरी को मनाया जाता है और मराठा साम्राज्य के पहले छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्मतिथि का जश्न है।
इतिहासकारों के अनुसार, शिवाजी महाराज का जन्म शिवनेरी किले में हुआ था, फाल्गुन कृष्ण पक्ष तृतीया को। 19वीं सदी में समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले ने पुणे में शिव जयंती का आयोजन शुरू किया। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि की खोज और उसका सजावट कर लोगों के लिए इस दिन को स्मरणीय बनाया।
छत्रपती शिवाजी महाराज यांच्या जयंतीनिमित्त, दूरदर्शी नेते, कुशल प्रशासक, विलक्षण रणनीतीकार आणि स्वराज्याचे पुरस्कर्ते अशा महान व्यक्तिमत्त्वाला आम्ही साष्टांग नमन करतो.
त्यांचे शौर्य आपल्याला प्रेरणा देईल, त्यांचे सुशासन आपल्यासाठी मार्गदर्शक ठरेल आणि न्याय व स्वाभिमानाची… pic.twitter.com/JI9dSJCedg
— Narendra Modi (@narendramodi) February 19, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज एक दूरदर्शी नेता, कुशल प्रशासक, रणनीतिक विचारक और स्वराज्य के प्रेरक थे। उन्होंने कहा, “उनका साहस हमें प्रेरित करे, उनका शासन हमें मार्गदर्शन दे और उनके न्याय एवं आत्म-सम्मान का भाव हमारे समाज को मजबूत करे।”
इसके बाद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने शिवाजी महाराज की छवि को लोकप्रिय बनाते हुए इस जयंती को लोक जागरूकता और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बनाया।
शिव जयंती का मुख्य उद्देश्य छत्रपति शिवाजी महाराज की मराठा साम्राज्य की स्थापना में भूमिका और उनके विरासत का सम्मान करना है।
आज भी महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में झांकियों, रैलियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से इस दिन को उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।
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