उत्तर प्रदेश के कानपुर में कथित तौर पर ‘I Love Muhammad’ बैनर हटाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब देशभर में फैलता दिख रहा है। बिहार से लेकर हैदराबाद तक कई हिस्सों में मुस्लिम समुदाय के लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। गुजरात के गोधरा में तो यह मामला हिंसा तक पहुँच गया, जहाँ कट्टरपंथियों ने थाने में तोड़फोड़ कर दी। साथ ही सोशल मीडिया पर भी ‘I Love Muhammad’ हैशटैग के साथ एक अभियान चलाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पैगंबर साहब की शान में गुस्ताखी की जा रही है।
हालाँकि, पुलिस की दर्ज की गई FIR इस पूरे मामले की असली तस्वीर सामने लाती है। विवाद की शुरुआत 4 सितंबर को हुई, जब कानपुर के रावतपुर थाना क्षेत्र के सैयद नगर मोहल्ले में बारावफात की रोशनी के कार्यक्रम के दौरान मुस्लिम समुदाय ने सजावट के लिए ‘I Love Muhammad’ का लाइट बोर्ड लगाया। पुलिस की FIR में लिखा है कि ऐसा पहली बार हुआ और आयोजकों ने इसे एक नई परंपरा की तरह शुरू किया। स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई तो पुलिस ने समझौता करवाते हुए बोर्ड को थोड़ी दूरी पर लगवा दिया और मामला शांत हो गया। यानी इस स्तर पर विवाद खत्म हो गया था और बोर्ड वहाँ लगा हुआ था।

असल तनाव अगले दिन 5 सितंबर को बढ़ा, जब बारावफात का जुलूस निकाला गया। FIR के मुताबिक, जुलूस के दौरान कुछ मुस्लिम युवक रावतपुर गाँव की हिंदू बस्ती से गुजरते समय वहाँ लगे हिंदू धार्मिक पोस्टरों को डंडों से फाड़ने लगे। यही घटना विवाद की जड़ साबित हुई। 10 सितंबर को पुलिस को CCTV फुटेज भी मिल गई, जिसमें स्पष्ट दिखा कि मुस्लिम युवकों ने जानबूझकर हिंदू धार्मिक पोस्टर फाड़े ताकि सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ा जा सके और अराजकता फैलाई जा सके।
यानी यह स्पष्ट है कि FIR सिर्फ ‘I Love Muhammad’ बैनर लगाने या हटाने को लेकर दर्ज नहीं की गई थी। मामला वास्तव में उस समय गंभीर हुआ जब जुलूस में शामिल कुछ युवकों ने हिंदू धार्मिक पोस्टरों को नुकसान पहुँचाया। बावजूद इसके, देशभर में प्रदर्शन सिर्फ बैनर हटाने की बात को लेकर किए जा रहे हैं और असली घटनाक्रम को छिपाया जा रहा है।
गुजरात में हुई हिंसा और देशभर में फैलते प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि अधूरी जानकारी को आधार बनाकर सांप्रदायिक तनाव बढ़ाया जा रहा है। ऐसे हालात में प्रशासन और समाज दोनों को और सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि छोटे विवादों को बड़े दंगों में बदलने से रोका जा सके।