केंद्र सरकार ने राज्यसभा में स्पष्ट किया है कि देश में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों का कोई सीधा और पक्का आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मंगलवार (9 दिसंबर 2025) को बताया कि हालाँकि वायु प्रदूषण कई प्रकार की बीमारियों, विशेषकर साँस संबंधी रोगों को बढ़ावा देता है, लेकिन केवल प्रदूषण को ही किसी मौत या बीमारी की एकमात्र वजह मानने के लिए अभी तक वैज्ञानिक आधार वाला ठोस डेटा मौजूद नहीं है।
सरकार का कहना है कि किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रदूषण का प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें खान-पान, काम का माहौल, आर्थिक स्थिति, पहले से मौजूद बीमारियाँ, प्रतिरोधक क्षमता और वंशानुगत कारण शामिल हैं। इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव के बाद ही तय होता है कि प्रदूषण किसी व्यक्ति को कितनी मात्रा में प्रभावित करेगा। सरकार ने स्वीकार किया कि वायु प्रदूषण एक महत्वपूर्ण “ट्रिगर” है जो साँस की दिक्कतें और संबंधित बीमारियाँ बढ़ा सकता है, लेकिन इसे अकेले मौत का कारण साबित करना अभी संभव नहीं है।
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के सवाल के जवाब में जाधव ने बताया कि भारत सरकार वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है। सरकार ने वर्ष 2019 में जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCCCH) लागू किया, जिसका उद्देश्य जलवायु-संवेदनशील स्वास्थ्य समस्याओं पर जागरूकता बढ़ाना और स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता को मजबूत करना है। इस कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय ने वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के लिए एक स्वास्थ्य अनुकूलन योजना तैयार की है और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के लिए राज्य स्तरीय कार्य योजनाएँ विकसित की गई हैं, जिनमें प्रदूषण नियंत्रण संबंधी विशेष अध्याय शामिल है। राज्यों को समय-समय पर जन स्वास्थ्य एडवाइजरी भी जारी की जाती है।
वायु प्रदूषण से प्रभावित और संवेदनशील समूहों—जैसे कार्यक्रम प्रबंधक, डॉक्टर, नर्स, आशा कार्यकर्ता, महिलाएँ, बच्चे, ट्रैफिक पुलिस और नगरपालिका कर्मचारी—के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्रदूषण से संबंधित स्वास्थ्य संदेशों के प्रसार के लिए अंग्रेज़ी, हिंदी और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में IEC सामग्री भी विकसित की गई है।
सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत स्वच्छ ईंधन (LPG) उपलब्ध करवाकर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को मजबूत किया है, जबकि स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से सफाई और स्वच्छता पर ज़ोर देकर अप्रत्यक्ष रूप से स्वच्छ वायु के लक्ष्य को समर्थन दिया जा रहा है। इसके अलावा, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) शुरू किया, जो देशभर में वायु गुणवत्ता सुधारने और प्रदूषण स्तर घटाने की एक व्यापक रणनीति के रूप में काम कर रहा है।
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